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    जरा सोचिए-99 नासूर क्यों बन गया मेरठ का ट्रैफिक और जाम

    -संतराम पाण्डेय- मेरठ शहर में लगने वाला जाम अब नासूर बन चुका है। ट्रैफिक पुलिस खामोश हो चुकी है। अधिकारी तक सुनने को तैयार नहीं। सड़क के किनारे अड्डा जमाए दरोगा जी चालान काट कर अपना टारगेट पूरा करते हैं और चले जाते हैं, जाम लगा है तो लगता रहे। अभी तो स्कूलों की छ़ुट्टी के वक्त जाम लगता है, थोड़े ही दिन बाद शादियां शुरू होने वाली हैं, इसे सोचकर शहर में निकलने को प्लान बनाना पड़ेगा। आखिर इस समस्या पर कैसे काबू पाया जाए, शायद अधिकारी समझ नहीं पा रहे हैं। कमिश्रर डा. प्रभात कुमार कई बार अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं लेकिन कान पर जूं नहीं रेंग रही है। लगता है कि पुलिस का वाहन चालकों पर कोई नियंत्रण नहींं रह गया है। अक्सर रोड पर ही वाहन मालिक गाडी को खडा कर चल देतेे हैं और पुलिस कुछ नहीं कहती है। कई बार सड़कों पर बेतरतीब खड़ी गाडिय़ों की वजह से जाम लग जाता है लेकिन इलाके की पुलिस अनदेखी करती रहती है। एसएसपी ने की थी तीन सीओ की ट्रैफिक में तैनाती बता दें कि ट्रैफिक की दशा सुधारने के लिए एसएसपी मंजिल सैनी ने 25 जुलाई को शहर को तीन जोन में बांटते हुए तीन सीओ की ट्रैफिक पुलिस में तैनाती की थी। उनका मानना था कि तीन सीओ की तैनाती के बाद जाम से निजात मिलेगी, लेकिन ट्रैफिक में तीन सीओ की तैनाती के बाद भी शहर जाम से मुक्त नहीं हो पाया। बच्चा पार्क, ईव्ज चौपला, मेघदूत चौराहा, बेगमपुल, भूमिया पुल, कचहरी पुल, हापुड़ अड्डा, मेट्रो प्लाजा, केसर गंज, जली कोठी, रोडवेज, महताब सिनेमा, ईदगाह आदि चौराहों पर रोज ही भयंकर जाम लगा रहता है। अब तक नहीं देखा गया कि तीनों ट्रैफिक के सीओ जाम खुलवाने के लिए मौके पर पहुंचते हों। ट्रैफिक लाइटें खराब शहर के प्रमुख चौराहों की ट्रैफिक लाइटें खराब पड़ी हुई हैं। ठीक करने के लिए कोई अधिकारी दिलचस्पी नहीं ले रहा है। ट्रैफिक लाइटों के बिना चौराहों पर एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है। दिल्ली रोड पर रेलवे रोड चौराहे से काफी लोग गुजरते हैं। इस चौराहे पर सभी टै्रफिक सिग्नल खराब हैं। ईव्ज चौराहे की सिग्नल लाइटों का भी यही हाल है। बच्चा पार्क पर पिछले कई सालों से सिग्नल लाइट्स खराब पड़ी हैं। काफी दिनों पहले तत्कालीन एसएसपी जे रविन्दर गौड़ ने मेरठ विकास प्राधिकरण को ट्रैफिक लाइट्स को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन हुआ कुछ नहीं। ऑटो और ई-रिक्शा चालक बन सिरदर्द सड़कें घेरकर अवैध पार्किंग बना चुके ऑटो और ई-रिक्शा चालक न हटने की कसम खा चुके हैं। पुलिस की हिम्मत लगता है जवाब दे चुकी है। बेगमपुल, नैयर पैलेस के सामने, साकेत चौराहा, हापुड़ अड्डा, रेलवे रोड, बागपत अड्डा, जीरो माइल इनके कब्जे में है। ऐसे में स्कूलों की छुट्टी के समय बसों के आ जाने से जाम लगना स्वाभाविक सा हो गया है। जीरो माइल से बेगमपुल तक ट्रैफिक का जो हाल रहता है, वह दिल्ली रोड पर बढ़ते ही हांफने लगता है। भैसाली बस अड्डे तक लोग जाम में फंसे रहते हैं। सोतीगंज का अतिक्रमण मुंह बाए खड़ा रहता है। केसरगंज, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा और बागपत रोड और रेलवे रोड चौराहे से घंटाघर तक एसपी सिटी कार्यालय के सामने जाम में फंसकर लोगों के पास केवल पुलिस को कोसने का विकल्प रह जाता है। जिला अस्पताल रोड, छतरी वाला पीर, खैरनगर, कबाड़ी बाजार, सर्राफा बाजार और देहली गेट चौराहे पर निरंतर जाम रहता है। शहर के मुख्य चौराहे बेगमपुल से लेकर जीरो माइल तक टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने सड़क घेरकर अवैध पार्किंग बना ली है। बेगमपुल से भैसाली बस अड्डे की तरफ भी ऑटो और ई-रिक्शा अवैध तरीके से सड़क पर खड़े होते हैं। यही हाल दिल्ली रोड पर फुटबाल चौराहा, दिल्ली चुंगी और नवीन मंडी के पास का है लेकिन पता नहीं क्यों सब कुछ जानते हुए पुलिस और ट्रैफिक अफसर खामोश क्यों हैं। मैनपावर की कमी नहीं विभाग अब मैनपावर का रोना नहीं रो सकता। सूत्रों के अनुसार ट्रैफिक महकमे में एक एसपी ट्रैफिक, तीन सीओ, एक इंस्पेक्टर, दो टीएसआई, 11 एचसीपी और 105 सिपाहियों के अलावा होमगार्ड तैनात हैं। एक जीप, दो इंटरसेप्टर वाहन, छह ट्रैमो के अलावा पुलिस क्रेन का संसाधन है महकमे के पास लेकिन शहर तो रोजाना जाम रहता है। चालान का टारगेट पूरा करें या..... सितंबर माह में ट्रैफिक पुलिस ने 10150 वाहनों के चालान काटे और 6 लाख रुपये से ज्यादा का शमन शुल्क वसूला गया। दरोगा जी सड़क पर तभी उतरते हैं, जब उन्हें रोजाना कम से कम दस चालान काटने का लक्ष्य पूरा करना होता है। इस दौरान दरोगा जी के आसपास जाम लग भी जाए, तो मजाल नहीं कि चालान छोड़कर जाम खुलवाया जाए। जहां दस चालान पूरे हुए, दरोगा जी अपना बस्ता संभाल लेते हैं। शहर में जाम रोकने की जिम्मेदारी थाना पुलिस की भी है लेकिन वह इसे अपनी जिम्मेदारी में तभी शामिल करती है, जब किसी सीनियर अधिकारी का फोन आ जाता है।